Natyshastra me ras sindhant: ek vagananik drtikon=नाट्यशास्त्र में रस सिद्धांत: एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण । (Science of Rasa)
| dc.contributor.author | Dr. Bharatkumar J. Odedara | |
| dc.date.accessioned | 2026-08-31T03:44:05Z | |
| dc.date.issued | 2026-03-31 | |
| dc.description.abstract | ‘नाट्यशास्त्र’ भारतीय कला साहित्य नृत्य और नाटक का आधारभूत ग्रंथ है जिसकी रचना भरत मुनि (लगभग 200 ईसा पूर्व से 200 ई के बीच) द्वारा की गई है। यह केवल अभिनय की पुस्तक नहीं बल्कि रंगमंच का एक संपूर्ण वैज्ञानिक और सौंदर्य शास्त्रीय ग्रंथ है। भरत मुनि रस को आस्वाद यह के रूप में परिभाषित किया है। उनका मानना था की नाटक का प्राथमिक उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शन को भाव जगत में प्रविष्ट कराकर ‘ब्रह्मानंद सहोदर’ की अनुभूति करना है। नाट्य शास्त्र के छठे अध्याय में भरत मुनि ने रस उत्पत्ति का सूत्र दिया है। "विभावानुभाव व्यभिचारि संयोगाद्रस निष्पत्ति: ।" (विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारी भावों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।) रस के चार प्रमुख तत्व है। भरत मुनि ने मूलत: आठ रस माने थे, लेकिन बाद में ‘शांत’ रस को जोड़कर नौ रस माने जाते हैं। | |
| dc.identifier.issn | 2583-8334 | |
| dc.identifier.uri | http://160.160.1.15:4000/handle/123456789/756 | |
| dc.language.iso | Hindi | |
| dc.publisher | SAMVED E -JOURNAL, RANGMATI PUBLICTION,Vol. 4, No. 1 | |
| dc.subject | Ras | |
| dc.subject | Natrshastra | |
| dc.title | Natyshastra me ras sindhant: ek vagananik drtikon=नाट्यशास्त्र में रस सिद्धांत: एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण । (Science of Rasa) | |
| dc.type | Article |
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